विशेष :कहीं टेंट में तो कहीं जेल में हैं राम

  13/04/2019


विशेष: चाय की चौपाल से।


गोस्वामी तुलसी दास ने श्रीरामचरित मानस में लिखा है-हरि अनंत हरि कथा अनंता। कहहिं सुनहिं बहुबिधि सब संता॥ इसी चौपाई से प्रेरणा लेकर मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जन्मदिन चैत्र मास की नवमी को इस बार एक नई रामकथा लिखने का प्रयास है। यह कथा है श्रीराम के संबंध में देश के दूषित राजनीतिक हालत की, विकृत सामाजिक सोच की, विलंबित न्याय व्यवस्था की और वोट के कुटिल राजनीति की। किस प्रकार प्रभु राम आज की कुटिल राजनीति के मोहरा बन गए हैं। कथित आधुनिक और पंथनिरपेक्षता के नाम पर विकृत सामाजिक सोच ने मर्यादा पुरुषोत्तम को सवालों के घेरे में खडा कर दिया है। रामराज्य के रूप में पूरे विश्व को न्याय व्यवस्था का पाठ पढाने वाला व्यक्तित्व स्वयं के अस्तित्व के लिए तारीखों में उलझे न्याय की चौखट पर खडा है। तेत्रा युग के सर्वमान्य कलयुग मेें सत्ता की राजनीति में ऐसे उलझ गए हैं कि सम्मान तो सब देना चाहते हैं, लेकिन वोट बैंक उनके कदम रोक देता है। यह ऐसा चक्रव्यूह हैं कि सवा करोड लोगों के आराध्य अपनी जन्मभूमि में टेंट हैं तो ननिहाल में कैद में हैं। इतना ही नहीं कुछ माह पूर्व के हृदय स्थल में तो राम-लक्ष्मण को जज के सामने पेश होना पडा।


राम के देश में प्रभु की हालत देखकर श्रीरामचरित मानस में श्रीराम और हनुमान के प्रथम भेंट का प्रसंग याद आता है। जब हनुमान और श्रीराम पहली बार आमने-सामने तो हनुमान ने श्रीराम से पूछा आप कौन हैं? कहां से आएं हैं? क्यों आए हैं? वन में घुमने का उद्देश्य क्या हैं? हनुमान के इस प्रश्न का उत्तर तुलसीदास ने इस चौपाई के साथ दिया है। हंसी बोले रघुवंश कुमारा, विधि कर लिखा को मेटन हारा।। अर्थात श्रीराम ने हनुमान के प्रश्नों का उत्तर देते हुए हंस कर बताया कि जो ब्रम्हा ने लिख रखा है, उसे कौन मिटा सकता है। जब प्रभु श्रीराम ने स्वयं स्वीकार किया कि ब्रम्हा ने रचना कर दी है उसे मिटाया नहीं जा सकता तो ऐसा लगता है कि शायद प्रभु को कलयुग में भी अपनी स्थिति का पूर्वानुमान रहा होगा। शायद यही कारण है कि कभी देश के चक्रवर्ती सम्राट रहे प्रभु राम को अपने ही जन्म स्थान पर एक अदद छत के लिए तरसना पड रहा है। यह पंथनिरपेक्षता के नाम पर चलने वाली दूषित राजनीति ही है कि राम के जन्म स्थान पर भव्य मंदिर निर्माण के लिए संघर्ष शुरू हुआ तो शासक ने राम भक्तों के संहार का आदेश जारी कर दिया। शासन की इस चुनौती को स्वीकार करते हुए युवाओं ने भी अपने प्राणों की आहुति दी और विवादित ढांचे को गिरा दिया। इसके साथ ही परिस्थितियां बदल गईं। पहले अयोध्या में मंदिर होने सबूत मांगते जाते थे। आज युवाओं के बलिदान के कारण वहां मस्जिद होने के सबूत मांगे जा रहे हैं।


अयोध्या में मंदिर निर्माण को लेकर राजनीतिक विरोध शुरू हुआ तो राजनीतिक समर्थन भी शुरू हो गया। यह दुभाग्यपूर्ण रहा कि विकृत सामाजिक सोच के कारण राम का उपासक होने का दावा करने वाले भी अल्पसंख्यकों के थोक वोट के लालच में सच बोलने का साहस नहीं जुटा पा रहे हैं। देश में ऐसे रामभक्तों की संख्या कम नहीं है, जो रामनवमी पर मंदिर जाएंगे,शोभायात्रा के मुख्य अतिथि बनेंगे और शामिल होंगे। मगर राम के होने का साक्ष्य मांगने से नहीं चूकेंगे। ये ऐसे लोग हैं जो वोट के लिए सूर्य से उसके रौशनी की गारंटी भी मांग सकते हैं। न्यायालय भी न्याय प्रिय प्रभु के साथ न्याय कर पा रहा है। तारीख पर तारीख फैसले की नियती बन गई है। नतीजा यह है जन्मभूमि में रामलला टेंट में विराजमान हैं।


यही स्थिति प्रभु राम के ननिहाल की है। छत्‍तीसगढ की राजधानी रायपुर शहर से सटे ग्राम चंदखुरी में भगवान श्रीराम का ननिहाल है। चंदखुरी को माता कौशल्या का मायका कहा जाता है। यहां तालाब के बीच में माता कौशल्या का मंदिर होने के साथ भगवान श्रीराम का भी मंदिर है। मंदिर का निर्माण 100 वर्ष पहले गांव के मालगुजार ने कराया था। मंदिर के रखरखाव तथा पुजारी के भरण-पोषण के लिए 16 एकड़ जमीन दान में दी थी। समय के साथ मंदिर का निर्माण कराने वाले मालगुजार का परिवार गांव छोड़ दिया। इसके बाद मंदिर की जमीन को लेकर कब्जा का विवाद शुरू हो गया है। जमीन पर अपना दावा ठोक कर भाजपा सांसद रमेश बैस के परिवार वालों ने मंदिर में ताला लगा दिया है। 25 वर्ष से श्रीराम मंदिर में कैद हैं। रामनवमी के दिन ग्रामीण मंदिर के बाहर ही पूजा करते हैं। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में श्रीराम को अपने ननिहाल के एक मंदिर में कैद से छुड़ाने संबंधी याचिका लंबित है।


वहीं गत वर्ष मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले के लवकुशनगर कोर्ट में श्रीराम और लक्ष्मण को अदालत में पेश किया गया। पंडित की मौजूदगी में श्रद्धालु प्रतिमाओं को लेकर कोर्ट पहुंचे और न्यायालय में पेश किया। शाम को भगवान के लौटने पर विशेष पूजा-अर्चना की गई। दरअसल चोरी के एक मामले में कोर्ट ने प्रतिमाओं को अदालत में पेश करने के लिए आदेशित किया था। ग्राम घटरा के रामजानकी मंदिर से चोरी गई श्रीराम व लक्ष्मण की प्रतिमाएं और चरण चौकी पुलिस ने बरामद कर ली थीं। मामला न्यायालय में विचाराधीन रहा, इसलिए कानूनी प्रक्रिया के तहत श्रीराम और लक्ष्मण की प्रतिमाओं को मंदिर के पुजारी ने अदालत के आदेश पर अदालत के सम्मुख प्रस्तुत किया और अब प्रतिमाएं मंदिर में विराजमान हैं। राम के देश में राम की हालत देखकर यही कहा जा सकता है कि विधि कर लिखा को मेटन हारा।। इस रामकथा में प्रभु का यह हाल देखकर यही लगता है कि होइहि सोइ जो राम रचि राखा। को करि तर्क बढ़ावै साखा।















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