पीएचई ने न्यायालय में कहा-नहीं है जशपुर जिले में पानी की समस्या

  12/06/2019


जशपुर जिले के नागरिकों को शुद्घ पेयजल उपलब्ध न होने पर मानवाधिकार उल्लंघन की याचिका में चौकाने वाला जवाब पीएचई विभाग ने न्यायालय में दिया है। विभाग ने न्यायालय में बताया कि शासकीय अभिलेख के अनुसार जिला जशपुर के समस्त ग्रामों में पेयजल उपलब्ध कराया गया है। किसी भी ग्रामों में पानी का घोर संकट नहीं है। यह जवाब सोशल मीडिया में खूब वायरल हो रहा है और आमलोगों के द्वारा विभाग को खूब खरी खोटी भी सुननी पड़ रही है।

जिले में जलसंकट को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता रामप्रकाश पांडे ने विशेष न्यायाधीश जशपुर रजनीश श्रीवास्तव के न्यायालय में याचिका लगाई थी। याचिका में जिले की स्थिति पर जानकारी देते हुए याचिकाकर्ता ने जिले में गंभीर संकट की स्थिति बताते हुए बताई गई थी। इस पर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने न्यायालय में जवाब में जलसंकट होने से साफ इंकार कर दिया। ऐसे में जिले भर से आ रही तस्वीरों व समाचारों का सीधे विभाग के द्वारा खंडन करते हुए ऐसी कोई स्थिति नहीं होना बताया गया है। मामले की अगली सुनवाई 18 जून को होगी और इस जवाब को लेकर बहस होनी है।

याचिकाकर्ता ने वकील ने बताया कि अगली सुनवाई में बहस के बाद भौतिक सत्यापन की मांग न्यायालय से की जाएगी। हम तथ्यों के आधार पर जनहित में इस विषय को लेकर आगे आए हैं। याचिकाकर्ता रामप्रकाश पांडे ने कहा कि जशपुर में जलसंकट को देखते हुए मानवाधिकार विशेष न्यायालय में परिवाद दायर किया गया था। जिस पर संज्ञान लेते हुए न्यायालय ने कलेक्टर व पीएचई विभाग को एक मेमो जारी कर पूछा था कि जिले में कहां-कहां जल संकट है और इसके लिए प्रशासन द्वारा क्या प्रयास किया गया। जिसके अनुकरण में पीएचई के कार्यपालन यंत्री की ओर से हास्यास्पद जवाब दिया कि जिले कोई भी जल संकट नहीं है और होने पर विभाग त्वरित निराकरण करता है। एक जिम्मेदार अधिकारी द्वारा दिया गया यह दुर्भाग्यपूर्ण जवाब है। यह न्यायालय के समक्ष गैरजिम्मेदाराना बयान है। यह अधिकारियों के हौसले बुलंद है, जो न्यायालय को गुमराह करने में भी नहीं चूक रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगली सुनवाई में हम सभी दस्तावेजों, प्रभावित क्षेत्रों के प्रतिनिधियों को भी अपनी समस्या न्यायालय के समक्ष रखने निवेदन किया है।

उधर, पीएचई के जवाब को लेकर जिले भर में लोगों की नाराजगी है। वन मित्र मंडल,  सिनगी सेना सहित कई समूहों ने जवाब पर आपत्ति जताते हुए पीएचई के जवाब को गैरजिम्मेदाराना बताया है।

यह है मामला

विशेष न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत परिवाद में याचिकाकर्ता रामप्रकाश पांडे ने न्यायालय को बताया कि जब उनकी टीम कई गांव में जनजागरण के लिए पहुंची तो देखने में आया कि ग्रामीण छोटे जलकुंड से अपने घरों में दो, तीन किलोमीटर दूर से पानी लाते हैं और उक्त जलकुंड भी बिल्कुल मटमैला हो चुका है। प्रदूषित पानी लोग पीने को मजबूर हैं, जिसके कारण विभिन्न रोग भी ग्रामीणों को हो गए हैं तथा कुपोषण की एक गंभीर समस्या रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं की टीम भी इस संबंध में कई बार सर्वे की और गंभीर रोग के लिए दूषित जल का सेवन प्रमुख कारण बताया। जिले के वनांचल में रहने वाले जनजाति समाज व आदिम जनजाति की महिलाएं घने जंगल पारकर पीने के लिए शुद्घ पानी लाते हैं। कई गांव की महिलाएं जंगली जानवरों एंव आपराधिक घटनाओं से बचने के लिए सामूहिक रूप से पानी लेने के लिए कई किलोमीटर का सफर करती हैं और कई बार जान जोखिम में डालकर यह सफर पूरा होता है।













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