अरुण जेटली पर एक श्रद्धांजलि के रूप में हमारी रिपोर्ट

  25/08/2019

अरुण जेटली की जीवन पर खास रिपोर्ट उन्हे हमारी श्रद्धांजलि..



वास्तविक तौर पर अरुण जेटली का राजनीति करियर तो उनके छात्र रहते ही शुरू हो गया था. दरअसल, 1973 में लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने 'संपूर्ण क्रांति आंदोलन' शुरू किया. इस आंदोलन में विद्यार्थी और युवा संगठनों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. जयप्रकाश नारायण (जेपी) ने अधिक से अधिक छात्रों को आंदोलन से जोड़ने के लिए राष्ट्रीय समिति बनाई. जेपी ने जेटली को इस राष्ट्रीय समिति का संयोजक बनाया. आपातकाल के वक्त 19 महीने रहे नजरबंद जेटली वर्ष 1974 में दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष बने.

1975-77 तक देश में आपातकाल के दौरान उनको मीसा एक्ट के तहत 19 महीने तक नजरबंद रहना पड़ा. मीसा एक्ट हटने के बाद जेटली जनसंघ में शामिल हो गए. अटल ने कैबिनेट में किया शामिल वर्ष 1991 में पहली बार जेटली को भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में सदस्य के तौर पर शामिल किया गया. इसके बाद वह काफी लंबे वक्त तक भाजपा प्रवक्ता रहे. 1999 में एनडीए सरकार बनने के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने जेटली को केंद्रीय कैबिनेट में शामिल किया.
अटल के कैबिनेट में बड़ी जिम्मेदारियां तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने कैबिनेट में जेटली को सूचना एवं प्रसारण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में जिम्मेदारी सौंपी. इसके अलावा निर्गुण राज्य (स्वतंत्र प्रभार), विश्व व्यापार संगठन मंत्रालय की जिम्मेदारी भी जेटली को सौंपी गई. 23 जुलाई 2000 को राम जेठमलानी ने अटल कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया. इसके बाद कानून, न्याय और कंपनी मामलों के मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी अटल ने जेटली को सौंपी. राज्यसभा से शुरू हुआ संसद का सफर वर्ष 2006 में जेटली पहली बार राज्यसभा सांसद बने. जून 2009 से वे राज्यसभा में विपक्ष के नेता बने. पार्टी में जेटली ने एक महत्वपूर्ण रणनीतिकार से लेकर कई बड़ी जिम्मेदारियां संभाली. 2014 लोकसभा चुनावों में उनको अमृतसर लोकसभा सीट से चुनावी मैदान में उतारा गया.

हालांकि, जेटली यह चुनाव हार गए, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें अपने कैबिनेट में शामिल करना चाहते थे. मोदी कैबिनेट में मिले 2 बड़े मंत्रालय जेटली की मेहनत और लगन को देखते पीएम मोदी ने उन्हें केंद्रीय वित्त और रक्षा मंत्रालय की दो बड़ी जिम्मेदारियां दी. इस बीच, जेटली को राज्यसभा से सांसद बनाया गया और केंद्रीय मंत्रिमंडल में उनका पद सुरिक्षत हो गया. नोटबंदी और जीएसटी में निभाई अहम भूमिका मई 2014 में जेटली राज्यसभा में सदन के नेता बने. कुछ समय बाद प्रधानमंत्री मोदी ने गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर को रक्षा मंत्री बना दिया और तबसे जेटली ने देश के वित्त मंत्री का पद संभाला था. नोटबंदी से लेकर जीएसटी लागू करने में जेटली की अहम भूमिका रही. ऐसा रहा कानूनी करियर कानूनी करियर की बात करें तो जेटली ने बतौर वकील खूब नाम कमाया.

आपातकाल के बाद से ही वह वकालत की प्रैक्टिस करने लगे. उन्होंने देश के कई हाईकोर्ट में अपनी तैयारी पूरी की और वर्ष 1990 में वह सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील नियुक्त हुए. इस पद पर पहुंचने से पहले ही वी. पी. सिंह ने 1989 में उन्हें देश का अतिरिक्त सॉलीसिटर जनरल नियुक्त किया था. बोफोर्स घोटाले से जुड़ी जांच की जरूरी कागजी कार्रवाई जेटली ने ही पूरी की थी. आडवाणी, सिंधिया को करवा चुके हैं अदालत से बरी अटल सरकार का कार्यकाल समाप्त होने के बाद 2004 में जेटली एक बार फिर वकालत के पेशे में आ गए. साथ ही वह भाजपा में विभिन्न उच्च पदों से जुड़े रहे. जेटली ने बतौर वकील शरद यादव, लालकृष्ण आडवाणी, माधवराव सिंधिया, बिड़ला परिवार और फिल्म निर्माता राम गोपाल वर्मा को अदालत से बरी करवाया. जेटली ने कानूनी और मौजूदा मामलों पर कई प्रकाशनों की रचना की है.


मोदी सरकार की पहली इनिंग में वित्त मंत्री के रूप में अरुण जेटली का सफर कुछ हटकर ही रहा है. पिछले 5 सालों में जेटली सरकार के कई अहम फैसलों में भागीदार रहे हैं. अरुण जेटली के कार्यकाल में नोटबंदी, जीएसटी, इनसॉल्वेंसी एवं बैंकरप्शी कोड, जनधन, कैश ट्रांसफर जैसे कई ऐतिहासिक फैसले लागू हुए. बहुत से जानकार तो जेटली को मोदी के लिए ‘संकट के साथी’ मानते हैं. मोदी खुद जेटली को बेशकीमती हीरा बता चुके हैं. फिलहाल मोदी की दूसरी इनिंग में कैबिनेट में जिसकी सबसे ज्यादा कमी खलेगी, वह नाम है अरुण जेटली.
मोदी के लिए जेटली कितने अहम
जानकार मानते हैं कि मोदी के लिए अरुण जेटली खास भरोसेमंदों में से एक हें और कई बार उन्होंने सरकार का बचाव बेहद कुशलता से किया है. कुछ लोग तो उन्हें मोदी के लिए वास्तविक ‘चाणक्य’ और ‘संकट के साथी’ कहते हैं. गुजरात दंगों से जुड़ी मोदी की कानूनी उलझनों से पार पाने में उनको कानूनी सलाह देने वाले विश्वसनीय सलाहकार की भूमिका निभाने वाले जेटली बाद में उनके मुख्य योद्धा और सलाहकार के रूप में उभरे. दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र संघ की राजनीति से मुख्यधारा की राजनीति में प्रवेश करने वाले जेटली पेशे से अधिवक्ता रहे हैं.
सरकार की बात लोगों तक पहुंचाने में आगे
सरकार की नीतियों और योजनाओं के बारे में लोगों तक पॉजिटिव असर हो, विपक्ष की आलोचनाबों को कारगर जवाब देना हो, हर मामले में जेटली आगे दिखते थे. पेट्रोलियम की कीमतों में उछाल हो, राफेल डील हो या जीएसटी की जटिलताएं, जेटली ने हर बार कुशलता से सरकार का बचाव किया.
5 साल के रिपोर्ट कार्ड में बड़े कदम
जीएसटी और आईबीसी जैसे बड़े सुधार
घाटे से जूझ रहे बैंकों में कंसोलिडेशन का दौर
FDI के नियमों को आसान कर विदेशी निवेश बढ़ाने में सफलता
महंगाई 7.2 से 2.9 फीसदी पर आई
बजट पेश करने की तारीख में बदलाव
रेल बजट को आम बजट में शामिल करना
ब्लैकमनी और बेनामी प्रॉपर्टी लॉ
राजकोषीय मजबूती बनी रही
बैंकों में एनपीए कम करने में सफलता
जनधन अकाउंट
आधार के बेस पर सामाजिक योजनाओं में डायरेक्ट बेनिफिट स्कीम
मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी
इन बातों पर हुई आलोचना
अर्थव्यवस्था की गति में आई सुस्ती को लेकर सरकार की आलोचना होती रही है. रिजर्व बैंक से सरकार के टकराव पर भी आलोचना हुई. रेपो रेट में कटौती का लाभ बैंकों ने ग्राहकों तक पूरी तरह से नहीं पहुंचाया. नोटबंदी को भी लोग सरकार की विफलता के रूप में देखते हैं. एनबीएफसी में लिक्विडिटी क्राइसिस.















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