जानिए क्या है नक्षत्र और जीवन में इनका प्रभाव

  04/04/2019



 भविष्यफल डेस्क। ज्योतिष शास्त्र में विभिन्न प्रकार के नक्षत्रों का जिक्र किया गया है। ये सभी नक्षत्र जितने महत्वपूर्ण हैं उतने ही वैयक्तिक जीवन पर भी असर डालते हैं। भारतीय वैदिक ज्योतिष की गणनाओं में महत्वपूर्ण माने जाने वाले 27 नक्षत्रों का जिक्र किया गया है। पुराणों में इन्हें दक्ष प्रजापति की पुत्रियाँ बताया गया है। नक्षत्र और राशि के अनुसार, मनुष्य का स्वभाव, गुण-धर्म, जीवन शैली जन्म नक्षत्र से जुडी हुई होती है। ये सच है कि जिस नक्षत्र में इंसान जन्म लेता है वह नक्षत्र उसके स्वभाव और आगामी जीवन पर अपना असर जरूर छोड़ता है।

चन्द्रमा का एक राशिचक्र 27 नक्षत्रों में विभाजित है, इसलिए अपनी कक्षा में चलते हुए चन्द्रमा को प्रत्येक नक्षत्र में से गुजरना होता है। आपके जन्म के समय चन्द्रमा जिस नक्षत्र में स्थित होगा, वही आपका जन्म नक्षत्र होगा। आपके वास्तविक जन्म नक्षत्र का निर्धारण होने के बाद आपके बारे में बिल्कुल सही भविष्यवाणी की जा सकती है। अपने नक्षत्रों की सही गणना व विवेचना से आप अवसरों का लाभ उठा सकते हैं। इसी प्रकार आप अपने अनेक प्रकार के दोषों व नकारात्मक प्रभावों का विभिन्न उपायों से निवारण भी कर सकते हैं। नक्षत्रों का मिलान रंगों, चिन्हों, देवताओं व राशि-रत्नों के साथ भी किया जा सकता है।

गंडमूल नक्षत्र - अश्विनी, आश्लेषा, मघा, मूला एवं रेवती !ये छ: नक्षत्र गंडमूल नक्षत्र कहे गए हैं !इनमें किसी बालक का जन्म होने पर 27 दिन के पश्चात् जब यह नक्षत्र दोबारा आता है तब इसकी शांति करवाई जाती है ताकि पैदा हुआ बालक माता- पिता आदि के लिए अशुभ न हो !

27 नक्षत्रों के नाम- कृत्तिका, रोहिणी ,मृगशीर्षा , आर्द्रा, पुनर्वसू, पुष्य,आश्लेषा ,मघा , पूर्वाफाल्गुनी ,उत्तराफाल्गुनी , हस्त , चित्रा , स्वाति , विशाखा ,अनुराधा , ज्येष्ठा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा , अभिजित ,श्रवण ,घनिष्ठा , शतभिषक , पूर्वाभाद्रपदा ,उत्तराभाद्रपदा , रेवती,अश्विनी ,भरिणी।













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