छत्तीसगढ़ में हाथियों का आतंक पांच जिलों तक पहुंचा

  29/11/2019


छत्तीगसढ़ हाथियों ने आतंक मचा रखा है। हाथियों का आतंक का असर पांच जिलों तक पहुंच गया है। आतंक इसलिए क्योंकि बेहद कम समय में इनका दायरा पांच जिलों से बढ़कर 10 जिलों तक बढ़ गया है। पांच साल में 263 जान लेने के साथ सिर्फ 2019 में 750 से अधिक मकान तोड़ चुके हाथियों ने 2850 से अधिक हेक्टेयर फसल रौंद दी है। 

पांच साल पहले तक हाथी सिर्फ कोरबा, कोरिया, रायगढ़, जशपुर व सरगुजा के कुछ वन क्षेत्रों तक सिमटे थे। अब ये महासमुंद, बलौदाबाजार, गरियाबंद के साथ सरगुजा संभाग के बलरामपुर, सूरजपुर तक फैल चुके हैं। जंगलों में वनवासियों की बस्तियां, आसपास के गांव जरूर इनके निशाने पर रहते थे। अब हाथी महासमुंद, अंबिकापुर में कलेक्टोरेट तक पहुंच गए, रायपुर के सीमावर्ती गांव में महीनों से इनका दल उपद्रव कर रहा है। कोरबा की कॉलोनियों से अक्सर इनको खदेड़ना पड़ता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक जंगलों का कटाव, खदानों में अंधाधुंध ब्लास्ट और रिहायशी इलाकों का बेहिसाब बढ़ाव भी इनके दूसरे इलाकों में बढ़ने की वजह है।

मध्य प्रदेश,  झारखंड और ओडिशा से जुड़े छत्तीसगढ़ को हाथियों का कॉरीडोर भी कहा जाता है। प्रमाण मिलते हैं कि यह इलाका सदियों से हाथियों के विचरण क्षेत्र का हिस्सा रहा है। स्थानीय लोग बताते हैं कि 90 के दशक में बड़ी तादाद में झारखंड से सरगुजा की सीमा में घुसे, इसके बाद आना-जाना बढ़ता गया फिर ये जंगल उनका स्थायी ठिकाना बन गए। इधर ओडिशा से भी इनका पलायन रायगढ़, महासमुंद, बलौदाबाजार, गरियाबंद जिले में होता गया। 

हाथियों की समस्या से निपटने वन विभाग ने ढेरों उपाय किये। पहले हुल्ला पार्टी मशाल लेकर खदेड़ती थी। अब यह बंद है। गांवों में सोलर फेंसिंग कराई गई, वह भी गायब हो गई है। अब लोगों को हाथियों की लोकेशन की सूचना देने के साथ जंगल में नहीं जाने की मुनादी कराई जाती है। कुमकी हाथियों पर लाखों खर्चने के बाद अभियान महासमुंद और उत्तर छत्तीसगढ़, दोनों जगह फेल रहा। मधुमक्खी पालन, भोजन की व्यवस्था करने सहित अन्य उपाय भी बेकार साबित हुए हैं। 

राज्य सरकार ने 4 वन मंडल कोरबा, कटघोरा, धरमजयगढ़ व सरगुजा के 1995 हेक्टेयर जंगल को शामिल कर लेमरू एलीफेंट रिजर्व बनाने की घोषणा की है। इसका सर्वे जारी है। सीएम भूपेश बघेल ने रिजर्व के भीतर ही 100 करोड़ का रेस्क्यू सेंटर बनाने की घोषणा की है। संभावना है कि रिजर्व बनने के बाद लोगों को कुछ राहत मिल सकती है। 2007 में केंद्र से मंजूरी मिलने के बावजूद यह योजना कभी अधिग्रहण तो कभी सर्वे जैसे कारणों से रुकी हुई थी। 













विज्ञापन
Facebook
वीडियो
आपका वोट
क्या भूपेश सरकार का १५ अगस्त तक का सफर उपलब्यियों भरा रहा ? क्या है आपकी राय ?
विज्ञापन
आपकी राय

संपर्क करे

अगर आप कोई सूचना, लेख , ऑडियो वीडियो या सुझाव हम तक पहुचाना चाहते है तो इस ई-मेल आई पर भेजे info@ekhabri.com या फिर Whatsapp करे 7771900010



  
विज्ञापन