झीरम कांड को चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में कांग्रेस

  13/04/2019


इस लोकसभा चुनाव में कांग्रेस छह साल पुराने झीरम कांड को चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में है। भाजपा अगर विधायक भीमा मंडावी की मौत को चुनाव में मुद्दा बनाएगी, तो कांग्रेस झीरम कांड को ताजा कर  उस पर पलटवार करेगी। कांग्रेस का कहना है कि झीरम कांड दुनिया का सबसे बड़ा राजनीतिक नरसंहार था, जिसमें 32 कांग्रेस नेता और जवान मारे गए थे।

पार्टी शुरू से इसे केवल नक्सली हमला नहीं, राजनीतिक षड्यंत्र मानकर जांच की मांग करती रही है। पूर्ववर्ती भाजपा सरकार से सीबीआइ जांच की मांग की और अभी खुद सत्ता में आने के बाद एसआइटी गठन करने के बाद केंद्र सरकार से एनआइए की जांच रिपोर्ट मांगी गई, कांग्रेस की दोनों मांगें पूरी नहीं हुई हैइसे ही मुद्दा बनाया जाएगा। झीरम कांड में कांग्रेस ने पूर्ववर्ती भाजपा सरकार पर नेताओं की सुरक्षा में चूक,  सूचनातंत्र विफल और राजनीतिक साजिश का आरोप लगाया था। आज भी पार्टी के नेता अपने इन आरोपों पर अड़े हैं।

विधानसभा चुनाव के घोषणापत्र में कांग्रेस ने झीरम कांड को मुद्दा बनाया था। मुख्यमंत्री ने एसआइटी बनाई थी, लेकिन हाईकोर्ट में याचिका लगने के कारण जांच स्र्क गई है। लोकसभा चुनाव में झीरम कांड मुद्दा नजर नहीं आ रहा था, लेकिन भाजपा विधायक मंडावी की नक्सल हमले में मौत के बाद भाजपा के आरोप को देखते हुए झीरम कांड फिर से चुनाव का मुद्दा बनता नजर आ रहा है। मंगलवार रात को मुख्यमंत्री बघेल ने झीरम कांड का दो बार जिक्र दिया। उन्होंने कहा भी कि हमसे ज्यादा पीड़ा को कौन समझेगा?

वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव के छह माह पहले 25 मई को कांग्रेस नेताओं का काफिला परिवर्तन यात्रा पर निकला था। एक सभा से लौटते समय झीरम घाटी में नक्सलियों ने कांग्रेस नेताओं के काफिले पर एम्बुस लगाकर हमला कर दिया था। तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके पुत्र दिनेश पटेल, पूर्व नेता-प्रतिपक्ष व बस्तर टाइगर कहे जाने वाले महेंद्र कर्मा, कांग्रेस के अन्य नेता-कार्यकर्ता, जवान समेत 32 लोगों को मार दिया था। बाद में इलाज के दौरान गुस्र्ग्राम मेदांता हॉस्पिटल में पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल की मौत हुई थी।

झीरम कांड होने के तीन दिन बार पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने मामले में त्वरित जांच और सुनवाई के लिए न्यायिक आयोग बनाया था। छह साल में आयोग की रिपोर्ट नहीं आ पाई है। सुनवाई जारी है। जनवरी में कांग्रेस सरकार ने तत्कालीन मुख्यमंत्री व गृहमंत्री को गवाह बनाने का आवेदन लगाया था, जिसे आयोग ने खारिज कर दिया था।

प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री बघेल ने दो जनवरी को झीरम कांड की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआइटी) का गठन किया। कांग्रेस सरकार का तर्क यह है कि एनआइए ने जांच में जिन बिंदुओं को छोड़ा है, केवल उसकी की जांच एसआइटी करेगी। एसआइटी के खिलाफ नेता-प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई है, जिस पर सुनवाई चल रही है।













विज्ञापन
Facebook
वीडियो
आपका वोट
क्या भूपेश सरकार का १५ अगस्त तक का सफर उपलब्यियों भरा रहा ? क्या है आपकी राय ?
विज्ञापन
आपकी राय

संपर्क करे

अगर आप कोई सूचना, लेख , ऑडियो वीडियो या सुझाव हम तक पहुचाना चाहते है तो इस ई-मेल आई पर भेजे info@ekhabri.com या फिर Whatsapp करे 7771900010



  
विज्ञापन