Special : संघर्षों से सत्ता तक जोश में हैं भूपेश - #WHATAJOSH

  26/10/2019


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सिर्फ 2 दिनों में न केवल तीन राज्यों में 3000 किलोमीटर से की यात्रा की


छत्तीसगढ़  में लोगों ने सत्ता परिवर्तन जिस उम्मीद से की थी, वह कितना पूरा होगा यह तो भविष्य के गर्त में है। प्रदेश के लोग भी इसका फैसला पांच साल बाद सुनाएंगे। मगर सत्ता संभालने के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की राष्ट्रीयस्तर पर पूछ-परख बढ़ी है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि देश के किसी भी राज्य में चुनाव हो वह पार्टी के स्टार प्रचारकों में रहे। हाल के दिनों में मुख्यमंत्री भूपेश ने न केवल पार्टी के लिए कई राज्यों को दौरा किया,  बल्कि राज्य के हित और विकास के लिए नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात कर प्रदेश की जरूरतों पर चर्चा की और सहयोग मांगा। इसके अलावा प्रदेश में निवेश और व्यापार को बढावा देने के लिए बायर सेलर मीट (क्रेता-विक्रेता सम्मेलन) का आयोजन किया। इसमें 19 देशों के  62 क्रेता और प्रदेश से 120 विक्रेताओं ने हिस्सा लिया। हाल ही में एक अग्रणी मीडिया समूह की रिपोर्ट के अनुसार एक ओर जहां पूरा देश मंदी से प्रभावित है वहीं छत्तीसगढ़ ऐसा प्रदेश है, जहाँ की सरकार के फैसलों से यहां मंदी की परछाई भी नहीं पड़ी। प्रदेश के अन्नदाता के कंधे पर कर्ज का बोझ नहीं है। भूपेश बघेल ने प्रदेश के आदिवासियों के हित के लिए केंद्रीय जनजाति कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा से उनकी मुलाकात कर विभिन्न विकास कार्यों को लेकर एक कार्ययोजना सौंपी और फंड स्वीकृत करने का आग्रह किया। छत्तीसगढ़ के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर प्रोत्साहन व विक्रय को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा हाल ही में आयोजित तीन दिवसीय बायर सेलर मीट (क्रेता विक्रेता सम्मेलन) में बहरीन, ओमान, जापान, संयुक्त अरब अमीरात, दक्षिण अफ्रीका, नेपाल, पोलैंड, जर्मनी, बांग्लादेश, सिंगापुर सहित अन्य देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। यह कदम छत्तीसगढ़ के उत्पाद, कृषि उपज,वनोपज,हैण्डलूम कोसा आदि को वैश्विक बाजार तक पहुंचाना और स्थानीय व्यापार को नए आयाम मिलेंगे।




मुख्यमंत्री भूपेश बघेल में यह जोश तो संघर्षों के दौर में रहा है। सत्ता मिलने के बाद ऐसा लग रहा था कि अब थोडा आराम की मुद्रा में होंगे। मगर उन्होंने सत्ता  संभालते ही गांधीजी के विचारों के आधार पर प्रदेश में विकास को गति प्रदान करने का फैसला लिया। गांधीजी के विचारों की देन है कि मुख्यामंत्री बघेल ने प्रदेश में गांवों के विकास के लिए अपना ड्रीम प्रोजेकट नरवा, गरुवा, घुरवा और बारी की शुरुआत की और कुछ-कुछ दिनों में अधिकारियों से प्रगति रिपोर्ट भी मांग रहे हैं। मुख्यमंत्री न केवल प्रशासनिक, बल्कि राजनीतिक रूप से भी उतने की उत्साह से सक्रिय हैं। पिछले एक साल में विपक्ष के जोरदार हमलों का भी दमदार जवाब देते रहे हैं। मुख्यमंत्री बघेल के दमदार प्रति उत्तर के कारण मुख्य विपक्षी दल भाजपा भी बैकफुट पर खडी हो गई और एक वर्ष तक सरकार के खिलाफ कोई प्रदर्शन नहीं करने का निर्णय लिया। हालांकि यह भी सच है कि भाजपा ने यह निर्णय अपने संगठन को मजबूत करने और सरकार को गलती करने का मौका देने के इरादे से लिया है।



बहरहाल मुख्यमंत्री ने गत दिनों नई दिल्ली में प्रदेश के हितों और विकास के लिए पूरी बेबाकी के साथ केंद्रीय मंत्रियों से बात की। उन्होंने केंद्रीय कर के माध्यम से छत्तीसगढ़ के हिस्से में आने वाले 1690 करोड़ की मांग की और वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण को अवगत कराया कि राज्य को 26015 करोड़ रुपए अंतरित किया जाना था लेकिन इसमें 1690 करोड़ की कटौती की गई है। यह किसी भी लिहाज से प्रदेश के हित में नहीं है। इसके बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात कर नया रायपुर में प्रस्तावित इंडियन एयरफोर्स के एयरबेस कैंप की स्थापना की लंबित प्रक्रिया को जल्द शुरू कराने की मांग की है।फिर प्रदेश में परिवहन सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए केंद्रीय मंत्री नितीन गडकरी से मुलाकात कर निर्माणाधीन और स्वीकृत विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्गों को शीघ्र पूरा कराने का अनुरोध किया है। मुख्यमंत्री ने बिलासपुर-पतरापाली अधूरे पुल निर्माण पर भी ध्यान आकृष्ट कराया।


मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दिल्ली से लौटते ही अपने आवासीय कार्यालय में मंत्रिपरिषद की बैठक ली और ताबडतोड फैंसले लिए। कैबिनेट की बैठक में छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम (संशोधन) अध्यादेश,  2019 एवं छत्तीसगढ़ नगर पालिका (संशोधन) अध्यादेश,  2019 का अनुमोदन किया गया। इसके तहत महापौर औदर अध्यक्षों का निर्वाचन अप्रत्यक्ष रीति से होगा। अब निर्वाचित पार्षदों द्वारा निर्वाचित पार्षदों में से ही महापौर या अध्यक्षों का निर्वाचन किया जाएगा। साथ ही ये चुनाव दलीय आधार और मतपत्र से होगा। पार्षद निर्वाचन के लिए आयु सीमा न्यूनतम 21 वर्ष तय है। इसके अलावा राज्य की नवीन औद्योगिक नीति 2019-24 का अनुमोदन किया गया। जो आगामी नवंबर से 31 अक्टूबर 2024 के लिए लागू होगी। आपसी सहमति से भूमि क्रय नीति, 2016 में संशोधन का अनुमोदन किया गया। इसके तहत आपसी सहमति से ग्रामीण क्षेत्रों में अर्जित की जाने वाली भूमि एवं उस भूमि पर स्थित स्थावर परिसंपत्तियों के मूल्य की मुआवजा राशि को दो गुना से बढ़ाकर 4 गुना किया गया है। राज्य के शहरी क्षेत्रों में नगरीय निकायों द्वारा निर्मित दुकानों के किराए में कटौती का निर्णय लिया गया। इससे तीन हजार हितग्राही लाभान्वित होंगे। पूर्व में इन दुकानों का किराया स्वीकृत प्रीमियम राशि का 7.2 प्रतिशत अधिकतम था जिसे घटाकर ऑफसेट प्राइस के 2 प्रतिशत पर सीमित किया गया। इससे निकाय क्षेत्रों में खाली दुकानों की नीलामी उचित मूल्य पर संभव हो सकेगी साथ ही निकायों की आय में भी वृद्धि होगी। इस कदम से स्थानीय युवाओं को भी रोजगार मिलेगा।




मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण के गठन आदेश की कंडिका-3(5) में संशोधन का अनुमोदन किया गया। जिला पंचायत अध्यक्ष कोरबा के अध्यक्ष को सदस्य के रूप में शामिल किया गया। विशुद्ध रूप से राजनीतिक