15 लाख मिला नहीं 72 हजार की क्या उम्मीद!

  15/04/2019


'15 लाख रुपया बैंक में आएगा बोले थे... हमारा बैंक में खाता भी है, लेकिन अभी तक एक रुपया नहीं आया...आप बता रहे हो, अब 72 हजार देंगे बोल रहे हैं...ये नेता लोग बोलते बस हैं,  करते कुछ नहीं हैं। देखो... हर तीन महीने में दो हजार रुपए देंगे बोल के जमीन की ऋण पुस्तिका पटवारी के पास जमा कराए थे... उसको भी छह महीना हो गया, लेकिन उसका भी पता नहीं है।' एक किसान हरदीप ने यह बात कही।

हाइवे, शहरी या अर्द्ध शहरी क्षेत्रों को छोड़ दें तो ज्यादतर लोग कांग्रेस की 'न्याय" योजन से अंजान हैं। अधिकांश लोगों को पता नहीं है कि कांग्रेस ने ऐसी कोई घोषणा की है। बस्तर के सुखदेव कहते हैं कि अभी चार महीने पहले यहां का चुनाव हुआ है,  यह तो दूसरा चुनाव है, क्या करना है, मतदान के दिन जाएंगे वोट डाल देंगे। मतदान का आधार क्या होगा पूछे जाने पर कहा कि किसी से कोई उम्मीद तो नहीं है, लेकिन इनमें जो हमारा भला रखते दिखेगा उसे वोट देंगे। सवाल हुआ भला कैसे होगा? 72 हजार रुपए साल का मिले तो..? इस पर तैश में आए गए मानो उनके अंदर की खुद्दारी जाग गई। बोले अपने मेहनत से कमाए पैसे से ही काम चलेगा,  फ्री में कितना भी मिले उससे दिन नहीं चलेगा।

समाचार चैनलों में राजनीतिक दलों की घोषणाओं और वादों पर चाहे जिनती चर्चा और बहस हो रही हो जमीन पर सन्नाटा है। बस्तर, कांकेर और यहां तक की राजनांदगांव के कई अंदस्र्नी क्षेत्रों में न राष्ट्रवाद दिख रहा है और न न्याय। लोग अपने कामों में व्यस्त हैं। चुनाव पर कोई खुलकर नहीं बोलता। दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के घोषणा पत्र और वादों पर सवाल किया जाता है तो कहते हैं यह सब चुनावी बात है। कुछ नहीं होने वाला।















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