मिराज ने आतंकियों को दिखाया मिरर, जानिए मिराज-2000 की कहानी

  26/02/2019



दिल्ली।पुलवामा हमले के दो हफ्तों के अंदर ही भारतीय वायुसेना ने आतंकियों को मुहतोड़ जवाब दिया है। एयरफोर्स ने एलओसी के पार जाकर जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी कैंपों पर 1000 किलो के बम गिराये हैं। जानकारी के मुताबिक तड़के 3 बजे चलाए गए ऑपरेशन में एयरफोर्स के 12 मिराज फाइटर प्लेन शामिल थे।इंडियन एयरफोर्स के बेड़े में शामिल मिराज- 2000 डीप पेनिट्रेशन स्ट्राइक एयरक्राफ्ट यानी लड़ाकू विमान है। यह अंदर तक घुसकर मार करने वाला विमान है और इसकी खास बात यह है कि ये भीतर तक जाकर टारगेट को ध्वस्त करने की क्षमता रखता है।


पता हो कि पाकिस्तान ने अमेरिका से एफ-16 लड़ाकू विमान खरीदे थे, जिसके जवाब में भारत ने फ्रांस की डसॉल्ट एविएशन को अक्टूबर 1982 में 36 सिंगल-सीटर मिराज-2000 एचएस और 4 ट्विन-सीटर मिराज-2000 टीएचएस खरीदे। मिराज-2000 को जून 1985 में भारतीय वायुसेना में औपचारिक रूप से शामिल किया गया था। डसॉल्ट ने 2015 में वायुसेना को अपग्रेडेड मिराज-2000 लड़ाकू विमान भी सौंपे थे।


मिराज-2000 की लंबाई 47 फीट है जबकि खाली विमान का वजन 7500 किलो है। ये विमान 13,800 किलो गोला बारुद के साथ भी 2,336 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ सकता है। मिराज-2000 किसी भी मौसम में उड़ान भर सकता है। इसे इस तरह से तैयार किया गया है कि आपातकाल स्थिति में इसे राष्ट्रीय राजमार्गों पर उतारा जा सकता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत ये है कि ये कम ऊंचाई पर भी काफी तेज गति से उड़ान भरने में सक्षम है।


बता दे कि भारत में मिराज-2000 का पहली बार इस्तेमाल 1999 के कारगिल युद्ध में किया गया था। कारगिल युद्ध के समय जब मिग-21 और मिग-27 नाकाम हो रहे थे, तब भारत ने पाकिस्तान की सप्लाय लाइन ध्वस्त करने के लिए मिराज-2000 का इस्तेमाल किया।













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